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जय श्री राम
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए, राम सीता का दर्शन कराके मुझे, मेरे सपने को साकार कर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।1।
दुःख देते मुझे मेरे ही पाप है, मेरे मन में है क्या जानते आप है, आप हर रुप है इसलिए कर कृपा, मेरी हर एक संकट को हर लिजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।2।
मैं भावुक तो हूँ पर नहीं भक्त हूँ, इसी कारण तो विषयों में आसक्त हूँ, वासना मुक्त कर मेरे मन को प्रभु, राम सीता की भक्ति से भर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।3।
तन निरोगी रहे धन भी भरपूर हो, मन भजन में रहे द्वंद्व दुःख दूर हो, कर्ज भी न रहे मर्ज भी न रहे, फर्ज निभता रहे ऐसा वर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।4।
मैं कथा भी कहूँ तो सियाराम की, मैं भगति भी करूँ तो सियाराम की, सृष्टि ‘राजेश’ दिखें सियाराममय, दास की दृष्टि में वो असर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।5।
प्रार्थना है यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए, राम सीता का दर्शन कराके मुझे, मेरे सपने को साकार कर दीजिए, प्रार्थना हैं यही मेरी हनुमान जी, मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए।6।
करो मन चलने की तैयारी। आये हो तो जाना होगा, शाश्वत नियम निभाना होगा। सूरज रोज़ किया करता है, ढ़लने की तैयारी।
स्वप्न सभी रह गए अधूरे, जाने कौन करेगा पूरे। कालबली सम्पन्न कर चुका, छलने की तैयारी।
हमसे कोई तंग न होगा, महफ़िल होगी रंग न होगा। गंगा के तट धू-धू करके , जलने की तैयारी। करो मन चलने की तैयारी।
मुंदरी उरझि गई राधिका की लट बीच,
ढूंढत फिरत स्याम, अपनी मुंदरिया।
ललिता ने पाय लई, मुंदरी सहेज लई, स्याम जू को जाय दई, हीरे की मुंदरिया। बोली इठलाय कछू भेंट तो निकारो, स्याम बोले स्याम, चूमि लेव, मोरी या अंगुरिया। चूमत हंसत जात, 'ललिता' कहत जात, राम करे खोय जाय, तोरी या बंसुरिया॥
राम सृष्टा भी है राम सृष्टि भी है
राम दृष्टा भी है और दृष्टि भी है
राम एकांत है राम महफिल भी है
राम रस्ता भी है राम मंजिल भी है
राम जीवन भी है राम मुक्ति भी है
राम है खोज भी राम युक्ति भी है
राम मनहर भी है और मनस्वी भी है
राम राजा भी है और तपस्वी भी है.
मोहे ब्रज की धुल बना दे,
लाड़ली श्री राधे,लाड़ली श्री राधे, स्वामिनी श्री राधे, मोहे ब्रज की धूल बना दे, लाड़ली श्री राधे
मैं साधन हिन किशोरी जी, दीनन में दीन किशोरी जी, दीनन में दीन किशोरी जी, मेरे सोये भाग्य जगा दे, लाड़ली श्री राधे, मोहे ब्रज की धूल बना दे, लाड़ली श्री राधे
अज्ञानी अभागिन हूँ दासी, अखियाँ दर्शन को है प्यासी, अखियाँ दर्शन को है प्यासी, मेरी नैनो की प्यास बुझा दे, लाड़ली श्री राधे, मोहे ब्रज की धूल बना दे, लाड़ली श्री राधे
जैसी भी हूँ मैं तुम्हारी हूँ, करुणा की मैं अधिकारी हूँ, करुणा की मैं अधिकारी हूँ, मीरा गोपाल मिला दे, लाड़ली श्री राधे, मोहे ब्रज की धूल बना दे, लाड़ली श्री राधे
जो राधे राधे कहते है, वो प्रिया शरण में रहते है, वो प्रिया शरण में रहते है, उसे अपना भक्त बना दे, लाड़ली श्री राधे, मोहे ब्रज की धूल बना दे, लाड़ली श्री राधे।।
हम एसे नहीं तुम्हें चाहने वाले जो आज तुम्हें कल ओर को चाहें ॥ फेंक दें आख निकाल दोई .... जो ओर किसी से नजरें मिलाएं ॥ लाख मिलें तुम से बढ़कर ..... तुम्ही को ही चाहें तुम्ही को सराहें जब लों तन मे प्राण रहें, तव लों हम प्रीत को नातों निभाएं
जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए, गम जमाने के सारे, गम जमाने के सारे,किनारे हुए,
अब कही देखने की ना ख्वाइश रही, अब कही देखने की ना ख्वाइश रही, जबसे वो मेरी, नज़रो के तारे हुए, 2 गम जमाने के सारे, गम जमाने के सारे,किनारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए,
वो एक नज़र सा डाल के जादू सा कर गये, नज़रे मिला के मुझसे ना जाने किधर गये,
दर्द ही अब हमारी दवा बन गया ............. हे बाँके बिहारी ......... दर्द ही अब हमारी दवा बन गया ......2
सवैया-
ये अग्नि तुम्हारी लगाई हुई ,तेरे बिन अब बुझाएगा कोन
परिवार जनों से नाता तजा ,उनमे हमको अपनाएगा कोन
श्री कृष्ण अनाथन को तज के ,दुखियों पर दया दिखाएगा कोन
ब्रिजराज तुम्हारे बिना हमको , अब अधराम्रत पान कराएगा कोन ॥
दर्द ही अब हमारी दवा बन गया ......2 यह दर्द भी उन्ही के नजारे हए जो कुच्छ भी यह दौलत है, वो तेरी ही बदोलत है, प्यारे गम जमाने के सारे, गम जमाने के सारे,किनारे हुए, जबसे बांके बिहारी हुमारे हुए