हे कृष्ण, याद आते रहो, मन को भाते रहो,

 स्थाई


हे कृष्ण, याद आते रहो, मन को भाते रहो,

लगी  बीमारी मुझको तेरे प्यार की।

तड़पाते रहो, नित रुलाते रहो,

लग जाए लगन तेरे इंतज़ार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो, मन को भाते रहो...


अंतरा 1 (अधिकार भाव)


श्याम बन जा मेरा, अपना कर ले मुझे,

इस तरफ देख ले, क्या है दिक्कत तुझे?

शायद मेरी ज़रूरत न होगी तुझे,

पर मिलना तुझसे ज़रूरी है मोहन मुझे।

तड़पाते रहो, नित रुलाते रहो,

लग जाए लगन तेरे इंतज़ार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो...


अंतरा 2 (शरणागति भाव)


भक्त तेरे अनेकों हैं मुझको पता,

है तुझ बिन मेरा कौन, ये तो बता?

चाहे जब तक वीराने में रख ले मुझे,

आ के इक दिन उठाना पड़ेगा तुझे।

पिता मेरे हो तुम, मेरी माता हो तुम,

वर्षा  कर दो दयालु परम प्यार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो...


अंतरा 3 (विरह भाव)


मेरे हृदय के मधुबन में आओ हरि,

रास्ता तेरा तक-तक के अंखियाँ भरीं   

आत्मा है मेरी, राधा रानी तेरी,

तेरी प्यासी वो, तू उसका प्यासा हरि।

आ जा अब दौड़ कर, द्वारिका छोड़ कर,

याद आती है यमुना के उस पार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो...


अंतरा 4 (मिलन व उल्लास भाव)


याद तेरी क्या आई, गजब हो गया,

भक्त तेरा खुशी में मगन हो गया।

बहार आई हो जैसे ऋतुराज की,

घटा छाई हो सावन में बरसात की।

करे चातक ज्यों शोर, वन में  कोंकी हो मोर,

घड़ी नज़दीक हो, मूसलाधार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो...


अंतरा 5 (रास भाव)


आश्विन शुक्ल पूनम की हो चाँदनी,

तेरी बंशी के स्वर में छिड़े रागिनी।

चले शीतल पवन, झूमे धरती गगन,

दिल में मीठी चुभन, लगी तुमसे लगन।

श्याम आजा मेरे संग नाचूँ तेरे,

दिल जलाए न माया ये बेकार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो...



अंतरा 6 (समर्पण व अंतिम पुकार)


मैं तुम्हारा सगा, तुम सगे हो मेरे,

मेरा जीवन समर्पित कन्हैया तेरे।

करके शादी, सगाई को पूरण करो,

मुझे दुनिया के झंझट उरण करो  ।

राम भरोसे के घर, बनके आ जाओ वर,

सजी बैठी हूँ दुल्हन मैं सरकार की।

हे कृष्ण, याद आते रहो, मन को भाते रहो,

लगी बीमारी मुझको तेरे प्यार की।


रचनाकार 

राम भरोसा जी माली 


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